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गुप्तकालीन प्रश्नोत्तरी, गुप्तकालीन कला, गुप्त साम्राज्य

 

गुप्तकालीन प्रश्नोत्तरी (उत्तर सहित) 

प्रश्न 1: समुद्रगुप्त ने किसको हराकर वैशाली पर विजय प्राप्त की?

उत्तर:  शक क्षत्रप

विस्तार: समुद्रगुप्त, जिन्हें भारत का "नेपोलियन" भी कहा जाता है, ने अपने शासनकाल में अनेक विजयें प्राप्त कीं। इनमें वैशाली पर विजय भी शामिल है। 335 ईस्वी में, उन्होंने शक क्षत्रप रुद्रदेव को हराकर वैशाली पर अपना अधिकार स्थापित किया। यह विजय गुप्त साम्राज्य के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण थी और इसने समुद्रगुप्त की शक्ति और प्रतिष्ठा को और बढ़ा दिया।

उदाहरण: वैशाली पर विजय प्राप्त करने के बाद, समुद्रगुप्त ने वहां एक अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया। यह यज्ञ शक्ति और समृद्धि का प्रतीक था और इसने गुप्त साम्राज्य की वैधता को स्थापित करने में मदद की।

प्रश्न 2: गुप्तकालीन शासकों द्वारा जारी किए गए सोने के सिक्कों पर क्या अंकित होता था?

उत्तर:   बहुमूल्य मणि एवं रत्न

विस्तार: गुप्तकालीन स्वर्ण सिक्कों को 'दीनार' कहा जाता था। इन सिक्कों का वजन लगभग 3.5 ग्राम होता था और इनमें सोने की मात्रा 98-99% तक होती थी। दीनारों पर आमतौर पर राजा का नाम नहीं, बल्कि विभिन्न प्रकार के बहुमूल्य रत्नों और आभूषणों की छवियाँ अंकित होती थीं। इन छवियों में देवी-देवताओं, पक्षियों, जानवरों और फूलों के चित्र शामिल थे। दीनारों का उपयोग व्यापार और लेनदेन के लिए किया जाता था और ये गुप्त साम्राज्य की समृद्धि का प्रतीक थे।

उदाहरण: समुद्रगुप्त द्वारा जारी किए गए दीनारों पर सूर्य देव, लक्ष्मी देवी और कमल के फूलों की छवियाँ अंकित थीं। ये छवियाँ गुप्तकालीन कला और संस्कृति की झलक प्रस्तुत करती हैं।

प्रश्न 3: गुप्तकालीन साहित्य में किस नगर को 'काशी' के नाम से जाना जाता था?

उत्तर:  वाराणसी

विस्तार: गुप्तकालीन साहित्य में वाराणसी को 'काशी' के नाम से जाना जाता था। यह नगर हिंदू धर्म के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल रहा है और आज भी है। काशी को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है और यहाँ गंगा नदी बहती है। गुप्तकालीन साहित्य में काशी का उल्लेख अनेक बार मिलता है। कालिदास जैसे प्रसिद्ध कवियों ने भी अपनी रचनाओं में काशी का वर्णन किया है।

उदाहरण: कालिदास की रचना 'अभिज्ञानशाकुंतलम' में काशी का वर्णन इस प्रकार मिलता है:

"काशी! काशी! तू देवताओं का निवास स्थान है, जहाँ गंगा नदी बहती है और भगवान शिव निवास करते हैं।"

प्रश्न 4: गुप्तकाल में किन धातुओं का उपयोग स्वर्ण आभूषणों के लिए किया जाता था?

उत्तर: सोना मात्र

विस्तार: गुप्तकाल में स्वर्ण आभूषणों के निर्माण के लिए मुख्य रूप से सोने का उपयोग होता था। सोने को एक पवित्र धातु माना जाता था और इसका उपयोग देवी-देवताओं की मूर्तियों और मंदिरों को सजाने के लिए भी किया जाता था। चांदी और तांबे का प्रयोग भी होता था, लेकिन कम मात्रा में। इन धातुओं का उपयोग मुख्य रूप से मिश्र धातु बनाने के लिए किया जाता था।

उदाहरण: गुप्तकालीन पुरातात्विक उत्खनन में सोने, चांदी और तांबे से बने अनेक आभूषण प्राप्त हुए हैं। इन आभूषण

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